
इडियोपैथिक पल्मोनरी फ़ाइब्रोसिस में फेफड़ों के ऊतक धीरे-धीरे कठोर होकर निशान (स्कार) में बदल जाते हैं, जिससे फेफड़े सख़्त हो जाते हैं और रक्त तक पहुँचने वाली ऑक्सीजन घट जाती है। यह गंभीर रोग है और अक्सर देर से पकड़ में आता है।
यह होता क्या है
फेफड़ों में हवा की लाखों छोटी थैलियाँ होती हैं, जिनकी दीवार से ऑक्सीजन रक्त में जाती है। फ़ाइब्रोसिस में यह दीवार मोटी होकर कठोर हो जाती है। कठोर फेफड़ा न ठीक से फैलता है, न ऑक्सीजन पहुँचा पाता है। "इडियोपैथिक" का अर्थ है कि कोई निश्चित कारण नहीं मिला।
बना हुआ निशान हटाया नहीं जा सकता — इसीलिए जल्दी पहचान महत्वपूर्ण है, क्योंकि इलाज नए निशान बनने की गति धीमी करता है।
लक्षण
- मेहनत पर साँस फूलना, जो धीरे-धीरे बढ़ता है
- लगातार सूखी खाँसी
- थकान और सहनशक्ति में कमी
- बिना कारण वज़न घटना
- उँगलियों के सिरों का फूलना (क्लबिंग)
- जाँच में फेफड़ों के निचले भाग में बारीक़ "क्रैकल" आवाज़
छह महीनों से बढ़ती साँस की तकलीफ़ के साथ सूखी खाँसी को केवल सिरप से नहीं, उचित जाँच से देखा जाना चाहिए।
जाँच
- छाती की HRCT सबसे महत्वपूर्ण जाँच है — यह निशानों का स्वरूप, फैलाव और मात्रा दिखाती है।
- फेफड़ों की कार्यक्षमता जाँच (DLCO सहित) — यह भविष्य की तुलना का आधार बनती है।
- रक्त जाँच — गठिया, स्क्लेरोडर्मा आदि रोगों को अलग करने के लिए।
- छह-मिनट वॉक टेस्ट — चलने पर ऑक्सीजन गिरती है या नहीं।
- आवश्यक होने पर ब्रोंकोस्कोपी या सर्जिकल बायोप्सी, तथा इकोकार्डियोग्राफी।
उपचार
एंटीफ़ाइब्रोटिक दवाएँ (पिरफेनिडोन, निंटेडानिब) मुख्य उपचार हैं। ये पहले से बने निशान नहीं हटातीं और तुरंत आराम भी नहीं देतीं — इनका लाभ भविष्य की फेफड़ा-क्षमता बचाने में है। लीवर और पाचन पर निगरानी आवश्यक है। आईपीएफ़ में स्टेरॉयड सामान्य उपचार नहीं है और हानिकारक हो सकता है, यद्यपि अन्य ILD में इसका उपयोग होता है।
इसके साथ — ऑक्सीजन का मूल्यांकन, पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन, एसिडिटी का इलाज, टीकाकरण एवं संक्रमण का शीघ्र उपचार, उपयुक्त युवा मरीज़ों में ट्रांसप्लांट के लिए समय पर रेफ़रल, तथा हर 3–6 माह में नियमित निगरानी।
विशेषज्ञ से कब मिलें
यदि तीन महीने से अधिक सूखी खाँसी और बढ़ती साँस की तकलीफ़ है, जाँच में क्रैकल सुनाई दिए हैं, या एक्स-रे/सीटी में फ़ाइब्रोसिस या "ILD" लिखा है — तो परामर्श लें। पुरानी सीटी फ़िल्में अवश्य साथ लाएँ, क्योंकि पुरानी और नई तुलना सबसे उपयोगी होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या पल्मोनरी फ़ाइब्रोसिस ठीक हो सकता है?
बन चुके निशान वापस नहीं होते और इसका कोई पूर्ण इलाज नहीं है। परंतु एंटीफ़ाइब्रोटिक दवाएँ नए निशान बनने की गति धीमी करती हैं, जिससे फेफड़ों की क्षमता लंबे समय तक बची रहती है। ऑक्सीजन, रिहैबिलिटेशन तथा एसिडिटी व संक्रमण का उपचार जीवन की गुणवत्ता सुधारते हैं।
क्या स्टेरॉयड से लाभ होता है?
आईपीएफ़ में नहीं। पहले इसका उपयोग होता था, पर अध्ययनों से पता चला कि यह लाभ नहीं करता और हानि पहुँचा सकता है। कुछ अन्य ILD में, जहाँ सूजन प्रमुख होती है, स्टेरॉयड उपयोगी रहता है — इसीलिए सटीक निदान आवश्यक है।
क्या यह छूत की बीमारी है या वंशानुगत?
यह छूत से नहीं फैलती। थोड़े मामलों में यह परिवार में चल सकती है, पर अधिकांश मरीज़ों में पारिवारिक इतिहास नहीं होता।
केवल एक्स-रे से काम क्यों नहीं चलता?
छाती का एक्स-रे शुरुआती फ़ाइब्रोसिस दिखाने में सक्षम नहीं है। HRCT बारीक़ विवरण दिखाती है, जिससे स्वरूप पहचाना जाता है और अक्सर बायोप्सी की आवश्यकता टल जाती है।
