
फेफड़ों के कैंसर में समय सबसे महत्वपूर्ण कारक है। संदिग्ध छाया दिखने से लेकर पक्के निदान और सही स्टेज तक पहुँचने का समय ही तय करता है कि कौन-से उपचार संभव रह जाते हैं। वायु केयर में ब्रोंकोस्कोपी, EBUS और थोरैकोस्कोपी डॉ. अजीत यादव स्वयं करते हैं — कहीं और भेजने की आवश्यकता नहीं।
चेतावनी के संकेत
- तीन सप्ताह से अधिक खाँसी, या पुरानी खाँसी के स्वरूप में बदलाव
- खाँसी में खून — एक बार भी, चाहे कितना भी कम
- नई और लगातार बनी रहने वाली साँस की तकलीफ़ या घरघराहट
- छाती, कंधे या पीठ में न मिटने वाला दर्द
- बिना कारण वज़न और भूख घटना, लगातार थकान
- आवाज़ बैठ जाना
- एक ही स्थान पर बार-बार छाती का संक्रमण
- चेहरे या गर्दन में सूजन, उँगलियों का फूलना
40 वर्ष से ऊपर के धूम्रपान करने वाले व्यक्ति में खाँसी के साथ खून आने पर एक्स-रे और प्रायः सीटी अवश्य कराएँ।
जोखिम
धूम्रपान प्रमुख कारण है, पर बड़ी और बढ़ती संख्या में मरीज़ ऐसे हैं जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया। अन्य कारण — दूसरों का धुआँ, चूल्हे का धुआँ, एस्बेस्टस/सिलिका/आर्सेनिक/डीज़ल के संपर्क वाला काम, रेडॉन, वायु प्रदूषण, पहले हुई टीबी या सीओपीडी, तथा पारिवारिक इतिहास।
निदान एवं स्टेजिंग
दो प्रश्नों के उत्तर आवश्यक हैं — यह है क्या, और कहाँ तक फैला है।
- कॉन्ट्रास्ट सहित सीटी छाती तथा PET-CT
- ऊतक की जाँच (बायोप्सी) अनिवार्य है — इसके बिना कोई कैंसर उपचार शुरू नहीं होता:
- नलियों के पास की गाँठ के लिए फ्लेक्सिबल ब्रोंकोस्कोपी
- मीडियास्टाइनल लिम्फ नोड्स के लिए EBUS
- छाती की दीवार के पास की गाँठ के लिए सीटी-गाइडेड बायोप्सी
- फेफड़े के आसपास पानी होने पर मेडिकल थोरैकोस्कोपी
- मॉलिक्युलर जाँच (EGFR, ALK, ROS1, PD-L1) — यह तय करती है कि टारगेटेड थेरेपी या इम्यूनोथेरेपी संभव है या नहीं।
EBUS क्यों महत्वपूर्ण है: मीडियास्टाइनल लिम्फ नोड्स में कैंसर है या नहीं, यही तय करता है कि सर्जरी उपयुक्त है या कीमो-रेडियोथेरेपी। EBUS इन्हें सुई से जाँचता है — बेहोशी की हल्की दवा के साथ, उसी दिन घर।
उपचार
सर्जरी शुरुआती चरण में सबसे अच्छा अवसर देती है, बशर्ते फेफड़ों की क्षमता पर्याप्त हो। रेडियोथेरेपी सर्जरी संभव न होने पर तथा लक्षण नियंत्रण के लिए। सिस्टेमिक थेरेपी — कीमोथेरेपी, टारगेटेड थेरेपी या इम्यूनोथेरेपी — मॉलिक्युलर प्रोफ़ाइल के आधार पर।
इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी उन्नत रोग की जटिलताएँ सँभालती है — नली में रुकावट हटाना, स्टेंट डालना, रक्तस्राव रोकना, और बार-बार जमा होने वाला पानी निकालना।
कब जाँच कराएँ
खाँसी में खून आने पर, जाँच में गाँठ या छाया मिलने पर, इलाज के बाद भी संक्रमण न मिटने पर, वज़न घटने के साथ लगातार खाँसी पर — शीघ्र अपॉइंटमेंट बुक करें। पुरानी सीटी फ़िल्में अवश्य साथ लाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या सीटी में गाँठ दिखने का मतलब कैंसर है?
प्रायः नहीं। अधिकांश छोटी गाँठें कैंसर नहीं होतीं — भारत में पुराना संक्रमण, निशान या ठीक हो चुकी टीबी आम कारण हैं। आकार, किनारे, समय के साथ बढ़ना और आपका जोखिम देखकर तय होता है। कई गाँठों को केवल समय-समय पर सीटी से देखा जाता है।
मैंने कभी धूम्रपान नहीं किया, फिर भी कैंसर हो सकता है?
हाँ। बड़ी और बढ़ती संख्या में मरीज़ ऐसे हैं। दूसरों का धुआँ, चूल्हे का धुआँ, काम के दौरान एस्बेस्टस या सिलिका का संपर्क, प्रदूषण तथा पहले हुई टीबी भी कारण हैं।
सीटी में दिख ही रहा है तो EBUS क्यों?
सीटी बताती है कि गड़बड़ी कहाँ है, पर यह नहीं कि वह क्या है। बड़ी लिम्फ नोड्स सामान्य सूजन की भी हो सकती हैं, और सामान्य आकार की नोड्स में भी कैंसर हो सकता है। EBUS सीधे नमूना लेता है, जिससे सही स्टेज तय होती है — और स्टेज ही तय करती है कि सर्जरी संभव है या नहीं।
क्या बायोप्सी से कैंसर फैलता है?
नहीं। यह एक भ्रांति है जो इलाज में हानिकारक देरी कराती है। ब्रोंकोस्कोपी और EBUS बायोप्सी हल्की बेहोशी में, उसी दिन घर लौटने वाली प्रक्रियाएँ हैं और सामान्यतः बहुत सुरक्षित हैं।
फेफड़े के आसपास बार-बार पानी भर जाए तो?
मेडिकल थोरैकोस्कोपी से पानी निकाला जा सकता है, प्लूरा की जाँच व बायोप्सी हो सकती है, और टैल्क प्लूरोडेसिस से उसे दोबारा भरने से रोका जा सकता है — प्रायः एक ही प्रक्रिया में।
