
अस्थमा भारत में फेफड़ों की सबसे आम दीर्घकालिक बीमारियों में से एक है — और सबसे अधिक नियंत्रित की जा सकने वाली भी। वायु केयर, रेवाड़ी में डॉ. अजीत यादव बच्चों (12 वर्ष से ऊपर), वयस्कों तथा वृद्धों में अस्थमा का उपचार करते हैं।
अस्थमा क्या है
अस्थमा में फेफड़ों तक हवा ले जाने वाली नलियों में लगातार सूजन बनी रहती है। इससे वे संवेदनशील हो जाती हैं और धूल, धुआँ, ठंडी हवा, परागकण या वायरल संक्रमण जैसी चीज़ों से अचानक सिकुड़ जाती हैं। साथ ही बलगम बनता है, जिससे साँस छोड़ना कठिन हो जाता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह सिकुड़न वापस खुल सकने वाली होती है — सही इलाज से अधिकांश मरीज़ सामान्य जीवन जी सकते हैं।
लक्षण
- साँस छोड़ते समय सीटी जैसी आवाज़ (घरघराहट)
- चलने-फिरने पर या रात में साँस फूलना
- सूखी खाँसी, जो देर रात या सुबह बढ़ जाती है
- छाती में जकड़न या भारीपन
- धूल, धुएँ, ठंडी हवा, तेज़ गंध या व्यायाम से लक्षणों का बढ़ना
कुछ लोगों में केवल रात की ज़िद्दी खाँसी ही एकमात्र लक्षण होती है। इसे कफ-वैरिएंट अस्थमा कहते हैं और अक्सर इसे छाती का संक्रमण समझकर बार-बार एंटीबायोटिक दे दी जाती है, जिसका कोई लाभ नहीं होता।
तुरंत चिकित्सा सहायता लें यदि साँस इतनी फूल रही हो कि पूरा वाक्य न बोल पाएँ, राहत देने वाला इनहेलर काम न कर रहा हो, या होंठ/नाखून नीले पड़ने लगें।
कारण एवं ट्रिगर
घर की धूल के कण, कॉकरोच, फफूँद, परागकण, तंबाकू का धुआँ, चूल्हे और खाना पकाने का धुआँ, वाहनों का धुआँ, सर्दियों का प्रदूषण, ठंडी-सूखी हवा, तेज़ इत्र और सफ़ाई के रसायन, पालतू जानवर, वायरल सर्दी-ज़ुकाम, व्यायाम, तनाव तथा कार्यस्थल पर आटा, लकड़ी का बुरादा या रसायन।
कुछ दवाएँ भी अस्थमा बढ़ा सकती हैं — विशेषकर बीटा-ब्लॉकर तथा कुछ मरीज़ों में दर्दनिवारक दवाएँ। नाक की एलर्जी, साइनस की समस्या और एसिडिटी का इलाज साथ-साथ करना आवश्यक है।
जाँच कैसे होती है
अस्थमा की पुष्टि केवल लक्षणों से नहीं, बल्कि साँस की जाँच से होनी चाहिए:
- विस्तृत इतिहास — लक्षणों का स्वरूप, ट्रिगर, रात में नींद टूटना, पारिवारिक इतिहास तथा घर व कार्यस्थल का वातावरण।
- स्पाइरोमेट्री — फूँक मारकर की जाने वाली सरल जाँच, जो बताती है कि नलियाँ कितनी सिकुड़ी हैं।
- रिवर्सिबिलिटी टेस्ट — दवा देने के बाद जाँच दोहराना। सुधार आना अस्थमा की पुष्टि करता है और इसे सीओपीडी से अलग करता है।
- छाती का एक्स-रे तथा आवश्यक होने पर एलर्जी जाँच।
उपचार
उपचार दो भागों में होता है, और इन्हें न समझ पाना ही बीमार बने रहने का सबसे बड़ा कारण है।
प्रिवेंटर (नियंत्रक) इनहेलर में साँस द्वारा दिया जाने वाला स्टेरॉयड होता है, जो भीतर की सूजन का इलाज करता है। यह रोज़ लेना होता है — चाहे लक्षण हों या न हों। यही अटैक कम करता है।
रिलीवर इनहेलर कुछ ही मिनटों में नली खोल देता है, पर सूजन पर कोई असर नहीं करता। यदि सप्ताह में दो बार से अधिक रिलीवर की ज़रूरत पड़े, तो इसका अर्थ है कि नियंत्रक दवा की समीक्षा आवश्यक है।
इसके साथ — इनहेलर लेने की सही तकनीक का प्रशिक्षण (अधिकांश "इलाज विफल" मामलों में दवा फेफड़ों तक पहुँचती ही नहीं), लिखित एक्शन प्लान, ट्रिगर से बचाव, नाक की एलर्जी व एसिडिटी का इलाज, धूम्रपान छोड़ना, तथा फ़्लू और निमोनिया का टीका।
गंभीर अस्थमा में, जो पूरी इनहेलर चिकित्सा पर भी नियंत्रित न हो, बायोलॉजिक उपचार पर विचार किया जाता है।
पल्मोनोलॉजिस्ट से कब मिलें
यदि आपके अस्थमा की पुष्टि कभी स्पाइरोमेट्री से नहीं हुई, सप्ताह में दो बार से अधिक रिलीवर लेना पड़ता है, रात में खाँसी से नींद टूटती है, पिछले वर्ष स्टेरॉयड गोलियाँ या आपातकालीन इलाज लेना पड़ा, या खाँसी आठ सप्ताह से अधिक बनी हुई है — तो परामर्श अवश्य लें।
पुरानी पर्चियाँ, इनहेलर और रिपोर्ट साथ लाएँ। वायु केयर, रेवाड़ी में परामर्श सोमवार, बुधवार एवं शुक्रवार दोपहर में उपलब्ध है — अपॉइंटमेंट बुक करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या अस्थमा पूरी तरह ठीक हो सकता है?
अस्थमा आमतौर पर जड़ से समाप्त नहीं होता, पर इसे इतना नियंत्रित किया जा सकता है कि यह दैनिक जीवन में बाधा न बने। कई बच्चों में उम्र बढ़ने के साथ यह काफ़ी कम हो जाता है। सही इनहेलर उपचार से अधिकांश वयस्कों को न दिन में लक्षण होते हैं, न रात में नींद टूटती है।
क्या इनहेलर की आदत पड़ जाती है या यह नुक़सान करता है?
नहीं। इनहेलर की लत नहीं लगती। यह दवा की बहुत छोटी मात्रा सीधे फेफड़ों तक पहुँचाता है, इसलिए गोलियों की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित है। प्रिवेंटर इनहेलर का स्टेरॉयड शरीर बनाने वाला स्टेरॉयड नहीं होता। उपयोग के बाद कुल्ला करने से गले की समस्या नहीं होती।
कैसे जानें कि अस्थमा नियंत्रण में है?
पिछले चार सप्ताह पर चार प्रश्न पूछें — क्या सप्ताह में दो बार से अधिक दिन में लक्षण हुए, क्या रात में नींद टूटी, क्या सप्ताह में दो बार से अधिक रिलीवर लेना पड़ा, और क्या किसी काम में रुकावट आई? किसी एक का उत्तर "हाँ" होने पर इलाज की समीक्षा आवश्यक है।
क्या अस्थमा और सीओपीडी एक ही हैं?
नहीं। दोनों में साँस फूलती है, पर अस्थमा प्रायः कम उम्र में शुरू होता है, घटता-बढ़ता रहता है और दवा से खुल जाता है; जबकि सीओपीडी अधिकतर लंबे समय के धूम्रपान या धुएँ से होता है और इसमें रुकावट स्थायी होती है। स्पाइरोमेट्री से अंतर स्पष्ट हो जाता है।
क्या अस्थमा में व्यायाम कर सकते हैं?
हाँ, और करना चाहिए। व्यायाम से फेफड़ों की क्षमता और नियंत्रण दोनों बेहतर होते हैं। यदि व्यायाम से लक्षण बढ़ते हैं तो इसका अर्थ प्रायः यह है कि अस्थमा का नियंत्रण सुधारने की आवश्यकता है, न कि व्यायाम छोड़ने की।




