
ब्रोंकाइटिस में फेफड़ों तक हवा ले जाने वाली नलियों में सूजन आ जाती है। अधिकांश मरीज़ वास्तव में "न जाने वाली खाँसी" लेकर आते हैं — और विशेषज्ञ का सबसे बड़ा काम यह पता लगाना है कि खाँसी क्यों है।
तीव्र और पुरानी ब्रोंकाइटिस
तीव्र (एक्यूट) ब्रोंकाइटिस प्रायः वायरल सर्दी-ज़ुकाम के बाद होती है। खाँसी तीन सप्ताह या उससे अधिक चल सकती है। यह अधिकतर वायरल होती है, इसीलिए एंटीबायोटिक से प्रायः कोई अंतर नहीं पड़ता।
पुरानी (क्रॉनिक) ब्रोंकाइटिस का अर्थ है — लगातार दो वर्षों में, कम से कम तीन महीने तक, अधिकांश दिनों में बलगम वाली खाँसी। यह लगभग हमेशा धूम्रपान, चूल्हे के धुएँ या कार्यस्थल की धूल से होती है और अक्सर सीओपीडी का हिस्सा होती है।
लक्षण
शुरू में सूखी, बाद में बलगम वाली खाँसी; बलगम का रंग (पीला/हरा होना अकेले बैक्टीरिया का प्रमाण नहीं); बार-बार खाँसने से छाती में दर्द; घरघराहट और हल्की साँस फूलना; तीव्र मामलों में हल्का बुखार और थकान।
चेतावनी के संकेत: खाँसी में खून, तीन दिन से अधिक तेज़ बुखार, अधिक साँस फूलना, छाती में दर्द, बिना कारण वज़न घटना, रात में पसीना, या आठ सप्ताह से अधिक चलने वाली खाँसी।
लंबी खाँसी की जाँच क्यों ज़रूरी है
आठ सप्ताह से अधिक की खाँसी अपने-आप में कोई निदान नहीं, एक लक्षण है। इसे केवल "ब्रोंकाइटिस" मान लेने से ये स्थितियाँ छूट सकती हैं — अस्थमा, सीओपीडी, टीबी, एसिडिटी (रिफ़्लक्स), नाक से गले में पानी आना, ब्रोंकिएक्टेसिस, रक्तचाप की कुछ दवाएँ, फेफड़ों का कैंसर, हृदय की कमज़ोरी तथा ILD।
जाँच
विस्तृत इतिहास एवं परीक्षण के बाद — छाती का एक्स-रे, स्पाइरोमेट्री, आवश्यक होने पर बलगम की जाँच (टीबी सहित), रक्त जाँच, अस्पष्ट स्थिति में सीटी, तथा रुकावट या गाँठ की आशंका पर ब्रोंकोस्कोपी।
उपचार
तीव्र ब्रोंकाइटिस में सहायक उपचार — तरल पदार्थ, आराम, भाप, तथा घरघराहट होने पर इनहेलर। एंटीबायोटिक केवल तभी दी जाती है जब बैक्टीरिया संक्रमण का वास्तविक प्रमाण हो।
पुरानी ब्रोंकाइटिस में — धूम्रपान/धुआँ छोड़ना (सबसे प्रभावी उपाय), इनहेलर, बलगम निकालने की तकनीक व फिज़ियोथेरेपी, फ़्लू व निमोनिया का टीका, अटैक का शीघ्र इलाज, तथा रिहैबिलिटेशन।
यदि कारण एसिडिटी, नाक की एलर्जी या कोई दवा है, तो उसका इलाज किसी भी कफ़ सिरप से कहीं बेहतर काम करता है।
विशेषज्ञ से कब मिलें
तीन सप्ताह से अधिक खाँसी, खाँसी में खून, बार-बार छाती का संक्रमण, रोज़ बलगम, वज़न घटना, रात में पसीना, या बढ़ती साँस की तकलीफ़ पर अपॉइंटमेंट बुक करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या ब्रोंकाइटिस में एंटीबायोटिक ज़रूरी है?
प्रायः नहीं। तीव्र ब्रोंकाइटिस अधिकतर वायरल होती है और स्वस्थ वयस्कों में एंटीबायोटिक न तो इसे जल्दी ठीक करती है, न जटिलताएँ रोकती है। यह तभी उचित है जब बैक्टीरिया संक्रमण का वास्तविक प्रमाण हो।
ब्रोंकाइटिस के बाद खाँसी कितने दिन रहती है?
तीन सप्ताह तक, कभी उससे भी अधिक — क्योंकि नलियों की परत को ठीक होने में समय लगता है। महत्वपूर्ण यह है कि खाँसी धीरे-धीरे कम हो रही हो। तीन सप्ताह बाद भी वैसी ही या बढ़ रही खाँसी की जाँच आवश्यक है।
क्या हरा बलगम एंटीबायोटिक का संकेत है?
नहीं। बलगम का रंग सूजन की कोशिकाओं से आता है और वायरल संक्रमण में भी बदलता है। निर्णय बुखार, तबीयत, जाँच के निष्कर्षों और पहले से मौजूद फेफड़ों की बीमारी को देखकर लिया जाता है।
खाँसी को लेकर कब चिंता करें?
तीन सप्ताह से अधिक चलने पर, तथा किसी भी समय खाँसी में खून, साँस फूलना, छाती में दर्द, वज़न घटना, रात में पसीना या लंबे समय की खाँसी के स्वरूप में बदलाव होने पर। भारत में दो-तीन सप्ताह से अधिक खाँसी पर टीबी की जाँच अवश्य सोचनी चाहिए।

