फ्लेक्सिबल ब्रोंकोस्कोपी श्वसन चिकित्सा की सबसे अधिक उपयोग होने वाली प्रक्रिया है। एक पतली, मोड़ी जा सकने वाली नली, जिसके सिरे पर कैमरा होता है, नाक या मुँह से साँस की नलियों में डाली जाती है — जिससे नलियाँ सीधे देखी जा सकती हैं और ठीक सही जगह से नमूना लिया जा सकता है।
क्यों की जाती है
- इलाज के बाद भी न मिटने वाली खाँसी
- खाँसी में खून आना — रक्तस्राव का स्थान खोजने के लिए
- एक्स-रे या सीटी में असामान्य छाया, गाँठ या बैठा हुआ हिस्सा
- फेफड़ों के कैंसर की आशंका — निदान व मॉलिक्युलर जाँच हेतु ऊतक लेना
- टीबी की आशंका जब बलगम निगेटिव हो या बलगम बन ही न रहा हो — भारत में यह बहुत महत्वपूर्ण कारण है
- अस्पष्ट संक्रमण, विशेषकर कमज़ोर प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीज़ों में
- ILD की जाँच
- नली की सिकुड़न का कारण और सीमा जानना
यह उपचार के लिए भी होती है — गाढ़ा बलगम या थक्का निकालना, साँस में चली गई वस्तु निकालना, और रक्तस्राव रोकना।
प्रक्रिया कैसे होती है
लगभग छह घंटे पहले से खाना बंद रखना होता है; दो घंटे पहले तक पानी के घूँट प्रायः लिए जा सकते हैं। खून पतला करने वाली दवाओं में बदलाव आवश्यक हो सकता है, इसलिए दवाओं की पूरी सूची साथ लाएँ।
नाक और गले में सुन्न करने वाली दवा लगाई जाती है और नस से हल्की बेहोशी दी जाती है, जिससे आप सुस्त और आरामदेह रहते हैं। पूरे समय ऑक्सीजन, नाड़ी और रक्तचाप की निगरानी होती है। नली नाक या मुँह से होकर स्वर-तंतुओं के पार, श्वासनली और फिर दोनों ओर की ब्रोंकाई तक जाती है।
अधिकांश निदान प्रक्रियाएँ 15–30 मिनट लेती हैं।
बाद में
बेहोशी उतरने तक, प्रायः एक-दो घंटे, निगरानी में रखा जाता है। गला सुन्न होने के कारण लगभग दो घंटे तक कुछ खाना-पीना नहीं है।
एक-दो दिन हल्का गला दर्द, आवाज़ भारी होना और बलगम में हल्का खून सामान्य है। बेहोशी के बाद 24 घंटे तक गाड़ी न चलाएँ; किसी को साथ लाएँ।
तुरंत संपर्क करें यदि अधिक खून आए, साँस बहुत फूले, छाती में दर्द हो, या बाद के दिनों में तेज़ बुखार आए।
जोखिम
यह सुरक्षित एवं स्थापित प्रक्रिया है; गंभीर जटिलताएँ कम हैं। बायोप्सी की जगह से हल्का रक्तस्राव सबसे आम है और प्रायः स्वयं रुक जाता है। प्रक्रिया के दौरान ऑक्सीजन कुछ गिर सकती है, जिसे ऑक्सीजन देकर सँभाला जाता है। ट्रांसब्रोंकियल बायोप्सी के बाद फेफड़ा बैठने (न्यूमोथोरैक्स) का थोड़ा जोखिम रहता है, जिसकी जाँच की जाती है।
बुकिंग
ब्रोंकोस्कोपी परामर्श के बाद तय की जाती है, जब आपका इतिहास, जाँच और इमेजिंग देखी जा चुकी हो। पुरानी सीटी/एक्स-रे फ़िल्में, रिपोर्ट और दवाओं की सूची साथ लाएँ। अपॉइंटमेंट बुक करें।
ब्रोंकोस्कोपी कैसे की जाती है — क्रम से
आप लगभग छह घंटे खाली पेट आते हैं। नाक और गले को स्प्रे या जेल से सुन्न किया जाता है, नस में ड्रिप लगाई जाती है और उसी से हल्की बेहोशी दी जाती है। छोटी उँगली से भी पतली नली नाक या मुँह से होते हुए स्वर-तंतुओं के नीचे साँस की नलियों में जाती है। इस दौरान साँस सामान्य चलती रहती है; ऑक्सीजन, नाड़ी और रक्तचाप मॉनिटर पर देखे जाते रहते हैं।
डॉक्टर मुख्य नलियों को देखते हैं और फिर ज़रूरत के अनुसार नमूने लेते हैं: धुलाई (वॉशिंग), ब्रशिंग, गाँठ से सुई द्वारा नमूना, या ऊतक के छोटे टुकड़े। नमूना लेने में दर्द नहीं होता, क्योंकि साँस की नली के भीतर दर्द की संवेदना नहीं होती। निदान वाली प्रक्रिया में सामान्यतः पंद्रह से तीस मिनट लगते हैं, उसके बाद एक-दो घंटे निगरानी और फिर घर। बेहोशी के कारण 24 घंटे तक गाड़ी न चलाएँ — किसी को साथ लाएँ।
ब्रोंकोस्कोपी का खर्च
शुल्क इस बात पर निर्भर करता है कि वास्तव में क्या किया गया — केवल देखना और धुलाई लेना कम खर्चीला है, जबकि बायोप्सी, सुई से नमूना, या कल्चर, टीबी की मॉलिक्युलर जाँच एवं कैंसर से जुड़ी जाँचों के लिए भेजे गए नमूनों का खर्च अलग से जुड़ता है। परामर्श के बाद, योजना स्पष्ट होने पर पूरी राशि बता दी जाती है, ताकि बाद में कोई आश्चर्य न हो। मौजूदा शुल्क के लिए 8563816000 पर कॉल करें या विज़िट पर पूछ लें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या ब्रोंकोस्कोपी में दर्द होता है?
दर्द नहीं होता। नाक और गला सुन्न कर दिया जाता है और नस से हल्की बेहोशी दी जाती है, इसलिए अधिकांश मरीज़ों को बहुत कम याद रहता है। स्वर-तंतुओं से नली गुज़रते समय दबाव और खाँसी की इच्छा हो सकती है। साँस पूरे समय सामान्य चलती रहती है।
कितना समय लगता है, क्या भर्ती होना पड़ेगा?
निदान प्रक्रिया 15–30 मिनट और उसके बाद एक-दो घंटे की निगरानी। सामान्यतः उसी दिन घर लौट सकते हैं। बेहोशी के कारण 24 घंटे गाड़ी न चलाएँ, इसलिए किसी को साथ लाएँ।
बाद में कब खा सकते हैं?
लगभग दो घंटे बाद, जब गले का सुन्नपन पूरी तरह उतर जाए और निगलना सुरक्षित हो। सुन्न गले में खाने-पीने से वह श्वास नली में जा सकता है। पहले पानी के घूँट लें।
टीबी होने पर क्या ब्रोंकोस्कोपी सुरक्षित है?
हाँ, और जब बलगम की जाँच निगेटिव हो या बलगम बन ही न रहा हो, तो प्रायः टीबी का निदान इसी से होता है। प्रभावित हिस्से से सीधे नमूना लेने पर सफलता दर काफ़ी बढ़ जाती है। उचित संक्रमण-नियंत्रण सावधानियाँ बरती जाती हैं।
ब्रोंकोस्कोपी और EBUS में क्या अंतर है?
सामान्य ब्रोंकोस्कोपी नलियों के भीतर देखती है। EBUS में अल्ट्रासाउंड जुड़ा होता है, जिससे नली के बाहर स्थित लिम्फ नोड्स और गाँठें देखकर सुई से नमूना लिया जा सकता है। कैंसर की स्टेजिंग के लिए EBUS ही उपयुक्त है।
रेवाड़ी में ब्रोंकोस्कोपी का खर्च कितना है?
यह इस पर निर्भर करता है कि क्या-क्या किया गया — केवल देखना और धुलाई सबसे कम खर्चीला है; बायोप्सी, सुई से नमूना तथा कल्चर, टीबी की मॉलिक्युलर जाँच या कैंसर संबंधी जाँचों का खर्च अलग से जुड़ता है। तारीख तय होने से पहले, परामर्श के बाद पूरी राशि बता दी जाती है। पूछने के लिए 8563816000 पर कॉल करें।
क्या ब्रोंकोस्कोपी पूरी बेहोशी में होती है?
फ्लेक्सिबल ब्रोंकोस्कोपी में नहीं। नाक और गला सुन्न किया जाता है और नस से हल्की बेहोशी दी जाती है, इसलिए अधिकांश मरीज़ों को बहुत कम याद रहता है, जबकि साँस पूरे समय स्वयं चलती रहती है। पूरी बेहोशी रिजिड ब्रोंकोस्कोपी में दी जाती है, जो अलग प्रक्रिया है।
