- खांसी में खून आ रहा हो, थोड़ा भी या धारियों के रूप में
- बिना कोशिश वज़न घट रहा हो, या रात में बहुत पसीना आता हो
- आराम करते हुए भी सांस फूले, या होंठ/उँगलियाँ नीली पड़ें
- सीने में तेज़ दर्द हो या दर्द बढ़ता जाए
- एक हफ़्ते से बुख़ार न उतर रहा हो
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सर्दी-ज़ुकाम के बाद खांसी होना आम है और प्रायः दो हफ़्ते में ठीक हो जाती है। लेकिन तीन हफ़्ते बाद भी बनी रहने वाली खांसी अलग बात है — यह अब संक्रमण का अंतिम हिस्सा नहीं, बल्कि एक लक्षण है जिसका कारण खोजा जाना चाहिए। सबसे आम ग़लती यही है कि एक और एंटीबायोटिक और एक और सिरप दे दिया जाए, और कारण कभी न ढूँढा जाए।
कितनी देर की खांसी ज़्यादा है
- 3 हफ़्ते से कम — आमतौर पर वायरल संक्रमण, अपने आप ठीक हो जाती है।
- 3 से 8 हफ़्ते — संक्रमण के बाद श्वास नली संवेदनशील रह जाती है। कई ठीक हो जाती हैं, कुछ नहीं।
- 8 हफ़्ते से अधिक — इसकी पूरी जाँच आवश्यक है। यह अपने आप नहीं जाएगी।
सामान्य कारण
अस्थमा, बिना घरघराहट वाला भी। कुछ लोगों में अस्थमा का एकमात्र लक्षण सूखी खांसी होती है — रात में, व्यायाम के बाद या ठंडी हवा में बढ़ जाती है। इसे कफ-वैरिएंट अस्थमा कहते हैं और यह वर्षों तक पकड़ में नहीं आता। स्पाइरोमेट्री से स्पष्ट हो जाता है।
संक्रमण के बाद की संवेदनशीलता। वायरल संक्रमण के बाद श्वास नली छह-आठ हफ़्ते तक चिड़चिड़ी रह सकती है। खांसी सूखी होती है और ठंडी हवा, गंध या बोलने से बढ़ती है। इसमें एंटीबायोटिक की ज़रूरत नहीं।
टीबी। भारत में टीबी आम है और दो-तीन हफ़्ते से अधिक की खांसी इसका मुख्य लक्षण है — विशेषकर वज़न घटने, शाम को बुख़ार या रात में पसीने के साथ। जाँच आसान है और इलाज से यह पूरी तरह ठीक होती है।
एसिड रिफ़्लक्स। पेट का अम्ल गले तक आकर श्वास नली को उत्तेजित करता है और खांसी पैदा करता है — ज़रूरी नहीं कि सीने में जलन भी हो।
नाक से पानी गिरना एवं एलर्जी। नाक के पीछे से बहता बलगम गले को उत्तेजित रखता है। छींक, बंद नाक या आँखों में खुजली साथ हो तो एलर्जी जाँच से कारण मिल जाता है।
धूम्रपान एवं सीओपीडी। धूम्रपान करने वालों की सुबह की बलगम वाली खांसी "सिर्फ़ स्मोकर्स कफ़" नहीं होती — प्रायः यह शुरुआती सीओपीडी है, और इसे जल्दी पकड़ना फ़ायदेमंद है।
काम की धूल एवं धुआँ। रेवाड़ी और धारूहेड़ा में औद्योगिक तथा निर्माण धूल बहुत है। काम के माहौल का खांसी के पैटर्न से मेल ज़रूर देखा जाना चाहिए।
बीपी की दवाएँ। -प्रिल से समाप्त होने वाली दवाएँ (रामिप्रिल, एनालाप्रिल) कुछ लोगों में सूखी खांसी पैदा करती हैं, कभी-कभी महीनों बाद शुरू होकर। दवा स्वयं बंद न करें, पर डॉक्टर को बताएँ ज़रूर।
परामर्श में क्या होता है
सबसे ज़्यादा जानकारी इतिहास से मिलती है — कब शुरू हुई, सूखी है या बलगम वाली, दिन के किस समय बढ़ती है, किससे शुरू होती है, घर या काम में क्या बदला, कौन-सी दवाएँ चल रही हैं, वज़न घटा है या नहीं।
फिर आवश्यकतानुसार: छाती का एक्स-रे; स्पाइरोमेट्री (यह दिखाती है कि श्वास नली सिकुड़ती है या नहीं और इनहेलर से खुलती है या नहीं — इसी से अस्थमा/सीओपीडी पक्का होता है, अनुमान से नहीं); बलगम की जाँच सहित टीबी की तेज़ मॉलिक्युलर जाँच; एलर्जी जाँच; और केवल आवश्यकता पड़ने पर सीटी स्कैन या ब्रोंकोस्कोपी।
क्या साथ लाएँ
पहले की सभी पर्चियाँ, छाती के एक्स-रे की फ़िल्म एवं रिपोर्ट, और सभी वर्तमान दवाओं की सूची (बीपी की दवाएँ सहित)। पुराना एक्स-रे हो तो अवश्य लाएँ — समय के साथ तुलना अकेली नई तस्वीर से अधिक बताती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
खांसी कितने दिन रहने पर विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए?
तीन हफ़्ते। खांसी में खून, वज़न घटना, एक हफ़्ते से अधिक बुख़ार या सांस फूलना हो तो उसी हफ़्ते दिखाएँ।
चार बार एंटीबायोटिक ले चुके, खांसी फिर भी है। क्यों?
क्योंकि लंबी खांसी के अधिकांश कारण बैक्टीरिया नहीं होते। अस्थमा, रिफ़्लक्स, एलर्जी और संक्रमण के बाद की संवेदनशीलता पर एंटीबायोटिक का कोई असर नहीं होता।
सूखी खांसी रात में बढ़ती है — इसका क्या मतलब है?
यह एक पहचाना हुआ पैटर्न है और इसका आम कारण अस्थमा होता है, उन लोगों में भी जिन्हें कभी घरघराहट नहीं हुई। इनहेलर से पहले और बाद की स्पाइरोमेट्री प्रायः एक ही विज़िट में उत्तर दे देती है।
तबीयत ठीक लगने पर भी टीबी हो सकती है?
हाँ। शुरुआत में टीबी केवल खांसी के साथ भी दिख सकती है। जाँच आसान है और इलाज से पूरी तरह ठीक होती है — इसीलिए दो-तीन हफ़्ते से अधिक की खांसी जाँचनी चाहिए।
सीटी स्कैन ज़रूरी है?
आमतौर पर नहीं। एक्स-रे और स्पाइरोमेट्री से अधिकांश उत्तर मिल जाते हैं। सीटी तभी उपयोगी है जब कोई विशेष प्रश्न खड़ा हो।


