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Vaayu Care
उपचार

मेडिकल थोरैकोस्कोपी

प्लूरा की जाँच, बायोप्सी एवं पानी निकालना

मेडिकल थोरैकोस्कोपी में फेफड़े और छाती की दीवार के बीच की जगह में एक छोटे चीरे से प्रवेश करके उसे सीधे देखा जाता है और प्लूरा की सतह से देखकर बायोप्सी ली जाती है। वायु केयर में यह डॉ. अजीत यादव करते हैं, जो मेडिकल थोरैकोस्कोपी पर बनी NCCP-ICS राष्ट्रीय दिशानिर्देशों के लेखकों में हैं।

क्यों की जाती है

फेफड़े के आसपास पानी जमा होने (प्लूरल इफ़्यूज़न) से साँस फूलती है, और इसका कारण जानना ज़रूरी है। कई मरीज़ों में पानी की जाँच और बिना देखे ली गई सुई-बायोप्सी से निदान नहीं हो पाता। भारत में यहाँ मुख्य रूप से दो स्थितियों में अंतर करना होता है — प्लूरा की टीबी और कैंसर — और यह उत्तर आगे का पूरा इलाज तय करता है।

थोरैकोस्कोपी इस स्थिति में सर्वोत्तम जाँच है, क्योंकि इसमें सतह देखकर असामान्य जगह से नमूना लिया जाता है, अंदाज़े से नहीं। टीबी और कैंसर दोनों में इसकी सफलता दर बिना देखे ली गई बायोप्सी से कहीं अधिक है।

उपयोग: अस्पष्ट प्लूरल इफ़्यूज़न; टीबी की आशंका; कैंसर या मेसोथेलियोमा की आशंका; बार-बार भरने वाले पानी को रोकने के लिए टैल्क प्लूरोडेसिस; सीटी में दिखी प्लूरा की मोटाई या गाँठ; तथा जटिल संक्रमण में बने खाने तोड़ना।

प्रक्रिया

यह पूरी बेहोशी के बिना — लोकल एनेस्थीसिया और हल्की बेहोशी में — की जाती है। आप करवट लेकर लेटते हैं, प्रभावित हिस्सा ऊपर की ओर।

अल्ट्रासाउंड से जगह चुनी जाती है, पसलियों के बीच छोटा चीरा लगाकर पोर्ट डाला जाता है। पानी निकालकर थोरैकोस्कोप अंदर डाला जाता है और फेफड़े, छाती की दीवार तथा डायफ़्राम की सतह सीधे देखी जाती है। असामान्य जगह से बायोप्सी ली जाती है।

यदि प्लूरा कैंसरग्रस्त दिखे और फेफड़ा ठीक से फैल जाए, तो उसी बैठक में टैल्क प्लूरोडेसिस किया जा सकता है — जिससे दोनों परतें आपस में चिपक जाती हैं और पानी दोबारा नहीं भरता। एक ही प्रक्रिया में निदान और स्थायी राहत — यही इसका बड़ा लाभ है।

अंत में छाती की नली (ड्रेन) लगाई जाती है। प्रक्रिया 30–60 मिनट लेती है, पर ब्रोंकोस्कोपी के विपरीत इसमें कुछ दिन भर्ती रहना पड़ता है।

पहले और बाद में

लगभग छह घंटे का उपवास; खून पतला करने वाली दवाएँ पहले से बंद की जाती हैं और क्लॉटिंग जाँची जाती है। हाल की सीटी और अल्ट्रासाउंड आवश्यक हैं।

फेफड़ा फैलने और ड्रेनेज घटने तक नली लगी रहती है। चीरे की जगह दर्द सामान्य है और दवा से नियंत्रित होता है। एक्स-रे से फेफड़े का फैलाव देखा जाता है। अधिकांश मरीज़ कुछ दिनों में घर लौट जाते हैं।

संपर्क करें यदि साँस बढ़ती जाए, बुखार आए, घाव के आसपास लाली फैले, या दर्द नियंत्रित न हो।

जोखिम

अनुभवी हाथों में यह सुरक्षित है। पोर्ट की जगह दर्द सामान्य है। सबसे आम जटिलता हवा का रिसाव लंबा चलना है, जो प्रायः ड्रेन जारी रखने से ठीक हो जाता है। टैल्क के बाद एक-दो दिन बुखार आम है। कभी फेफड़ा पूरी तरह नहीं फैलता ("ट्रैप्ड लंग"), ऐसे में प्लूरोडेसिस काम नहीं करता और स्थायी कैथेटर बेहतर विकल्प होता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या इसमें पूरी बेहोशी दी जाती है?

नहीं। मेडिकल थोरैकोस्कोपी लोकल एनेस्थीसिया और हल्की बेहोशी में, एक ही छोटे पोर्ट से की जाती है। यह सर्जिकल VATS से अलग है, जो थोरैसिक सर्जन पूरी बेहोशी में कई पोर्ट लगाकर करते हैं।

केवल पानी निकालकर जाँच क्यों नहीं?

पानी की जाँच और सुई-बायोप्सी पहले किए ही जाते हैं और कई मरीज़ों में उत्तर मिल जाता है। जब नहीं मिलता, तब थोरैकोस्कोपी में सतह देखकर असामान्य जगह से नमूना लिया जाता है — इसीलिए इसकी सफलता दर कहीं अधिक है।

कितने दिन भर्ती रहना पड़ेगा?

ब्रोंकोस्कोपी के विपरीत इसमें छाती की नली लगाई जाती है, इसलिए कुछ दिन भर्ती रहना पड़ता है। अधिकांश मरीज़ कुछ दिनों में घर लौट जाते हैं। टैल्क प्लूरोडेसिस के बाद अवधि थोड़ी अधिक होती है।

टैल्क प्लूरोडेसिस क्या है?

इसमें प्लूरा की जगह में स्टेराइल टैल्क पाउडर डाला जाता है, जिससे दोनों परतें चिपक जाती हैं और पानी दोबारा नहीं भरता। यह तब किया जाता है जब पानी बार-बार भर रहा हो, और फेफड़ा ठीक से फैलने पर उसी बैठक में हो सकता है।

बाद में दर्द होगा?

पोर्ट और ड्रेन की जगह दर्द होता है, जो अपेक्षित है और नियमित दवा से नियंत्रित रहता है। ड्रेन निकलने के बाद कुछ दिनों में यह कम हो जाता है।

यह उपचार आपके लिए उपयुक्त है या नहीं, यह परामर्श के दौरान आपके इतिहास, जाँच और रिपोर्ट देखने के बाद तय होता है। सहमति से पहले जोखिम और विकल्प समझाए जाते हैं।
इस सप्ताह क्लिनिक में अपॉइंटमेंट उपलब्ध हैं।
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